यह लेख उत्तर प्रभाववाद (Post Impressionism) के बारे में विस्तार से आपको बताने वाला है। इससे पहले पिछले लेखों में हम प्रभाववाद (Impressionism) व नव-प्रभाववाद (Neo-Impressionism) के बारे में पढ़ ही चुके हैं। तो चलिए इस लेख में निम्नलिखित विदुओं के आधार पर हम उत्तर प्रभाववाद (Post Impressionism) के विषय में चर्चा करते हैं:
{अवश्य पढ़े: प्रभाववाद की कला, नव प्रभाववाद की कला, क्लोड मोने (Claude Monet)}
- परिचय
- प्रष्ठ-भूमि
- उत्तर प्रभाववाद का जन्म
- उत्तर प्रभाववाद की कला
- प्रमुख चित्रकार
- उत्तर प्रभाववाद व नयी कला धाराएँ
- निष्कर्ष
परिचय
प्रभाववाद की कला आंदोलन के उदय होने के बाद नव-प्रभाव वाद का उदय हुआ। नव प्रभाववाद के बाद उत्तर प्रभाव का विस्तार हुआ। तीनों आंदोलन में एक सामान्य वात थी और वो थी रंगो को लगाने की तकनीक। अंतर तीनों कला आंदोलनों में केवल विषय वस्तु के महत्व का हो गया। साथ- ही साथ लगातार नए प्रयोगों व अध्ययानों ने भी प्रभाववाद को और वितरित रूप किया। तो चलिए समझते हैं कि उत्तर प्रभाववाद की कला क्या है। उत्तर प्रभाववाद की कला का संस्थापक या प्रेरणता पॉल सेजांन (Paul Cezanne) को माना जाता है।
प्रष्ठ-भूमि (Background)
- वैज्ञानिक प्रगति का लगातार होना 19वीं सदी की सबसे बड़ी प्रगति थी। उस समय मानव जीवन में भौतिकता व यांत्रिकता बढ़ रही थी।
- इस भौतिकता व यांत्रिकता विकास ने मानव मन को भी व्याकुल बनाया। अतः मानवजाति शांति की खोज में अग्रसर होने लगी। इस परिवर्तन ने कला व साहित्य पर भी प्रभाव डाला।
- परिणामस्वरूप चित्रकार भी बाहरी दृश्यों की अपेक्षा आंतरिक गुणों की अभिव्यक्ति की ओर आकर्षित हुए।
- अतः प्रभाववाद के मुख्य लक्षण प्रकाश के गुण से चित्रकारों का काम नहीं चलने वाला था।
- इसलिए प्रभाव वाद के बाद नव प्रभाववाद का उदय हुआ व नव-प्रभाव वाद के बाद उत्तर प्रभाववाद का हुआ।
- उत्तर प्रभाववादी चित्रकारों ने प्रभाववाद व नव-प्रभाववाद से आगे बढ़ते हुए अपनी शैली नयापन लाए। इन चित्रकारों ने अमूर्त या प्रतीकात्मक तत्वों को अपनी शैली में शामिल किया।
- अलग-अलग कलधाराओं को विकसित होने का अवसर भी मिला। अतः उत्तर प्रभाववाद के लिए उपयुक्त पृष्ठ-भूमि तैयार थी जिसमें पॉल सेजन की महतवपूर्ण भूमिका रही।

उत्तर प्रभाववाद (Post Impressionism) का जन्म
- उत्तर प्रभाववाद लगभग 1880 और 1905 के बीच विकसित हुआ।
- यह आंदोलन मुख्य रूप से फ़्रांसीसी कला आंदोलन था।
- यह आंदोलन प्रभाववादी कला आंदोलन के विरुद्ध में विकसित हुआ।
- उत्तर प्रभाववादी चित्रकार, प्रभाववाद की कला के विषयवस्तु के कम महत्व व उनके अंकन से संतुष्ट नहीं थे।
- इसी कारण वे प्रभाववाद की कला के विकास में सहयोगी बनना नहीं चाहते।
- उत्तर प्रभाववाद शब्द का पहली बार इस्तेमाल कला समीक्षक रोजर फ्राई (Roger Fry) ने किया था। इन्होंने 1910 में लंदन (इंग्लंड) के ग्राफ्टन गैलरी (Grafton Galleries) में एक प्रदर्शनी आयोजित की।
- इस प्रदर्शनी का शीर्षक मोने एंड पोस्ट इम्प्रेशनिज़म दिया। उत्तर प्रभाववाद की इस प्रदर्शनी में अधिकांश चित्रकार युवा थे।
- कला समीक्षक फ्रैंक रटर (Frank Rutter) ने कला समाचार में फ्रांस के पोस्ट-इंप्रेशनिस्ट शो के लिए एक विज्ञापन भी था।
- यह विज्ञपन फ्राई के शो से तीन हफ्ते पहले 15 अक्टूबर 1910 को दिया गया था।
- फ्राई की प्रदर्शनी में अधिकांश कलाकार प्रभाववादी चित्रकारों से कम उम्र के थे।
- प्रदर्शनी के शीर्षक के विषय में रोजर फ्राई (Roger Fry) ने कहा था, “सुविधा के उद्देश्य से, इन कलाकारों को एक नाम देना आवश्यक था, और मैंने सबसे अस्पष्ट और सबसे गैर-प्रतिबद्ध नाम के रूप में पोस्ट-इंप्रेशनिज़्म चुना।
- उत्तर प्रभाववाद कोई औपचारिक कला आंदोलन नहीं था। वास्तव प्रभाववाद की कला के विरोध में जो भी कला आंदोलन विकसित हुईं, उन्हें उत्तर प्रभाववाद कहा गया।
- उत्तर प्रभाववाद (Post Impressionism) कोई औपचारिक या निश्चित आंदोलन नहीं रहा। बल्कि उत्तर प्रभाववाद (Post Impressionism) का प्रयोग उन सभी कला आंदोलनों के लिए किया गया जो प्रभाववाद की कला (Impressionism Art) के विरोध में थीं।

उत्तर प्रभाववाद की कला
- उत्तर प्रभाववाद (Post Impressionism) ने प्रभाववाद (Impressionism) सीमाओं को खारिज करते हुए प्रभाववाद का विस्तार किया।
- वास्तव में तकनीक के मामले में उत्तर प्रभाववाद (Post Impressionism), प्रभाववाद की कला (Impressionism Art) के जैसा ही है।
- इसमें केवल विषयवस्तुओं की संरचना पर भी महत्व दिया जाने लगा।
- उत्तर प्रभाववाद (Post Impressionism) की कला का उद्देश्य कला में रूपात्मकता व विषयवस्तु को महत्व देना था।
- प्रभाववाद (Impressionism) की तरह ही इसमें भी शुद्ध रंगों का प्रयाओग व रंगों को सीधे कैन्वस में लगाया जाता था। अंतर केवल विषय वस्तु के आंतरिक भावना की अभिव्यक्ति व उसके तार्किक विश्लेषण का था।
- उन्होंने ज्वलंत रंगों का उपयोग करना जारी रखा, कभी-कभी इम्पैस्टो (पेंट का मोटा अनुप्रयोग) और जीवन से चित्रकारी का उपयोग किया।
- उत्तर प्रभाववादी चित्रकारों ने सरल आकारों की सहायता से रूपात्मक तत्वों को महत्व दिया। कुल मिला के इस कला के चित्रकारों ने कला में लगातार प्रयोग किए और नयी-नयी कला तकनीक व विषयवस्तु पर काम किया।
- इसका परिणाम ये हुआ कि आधुनिक कला को नयी-नयी कला धाराएँ देखने को मिलीं।(इनके बारे में हम आगे जानने वाले हैं।)
प्रमुख चित्रकार
आंदोलन के प्रमुख कलाकार पॉल सेज़ेन (Paul Cezanne) हैं जिन्हें पोस्ट-इंप्रेशनिज़्म के पिता के रूप में जाना जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य चित्रकारों में निम्नलिखित चित्रकार प्रमुख हैं:
- पॉल गाउगिन (Paul Gaugin),
- विंसेंट वैन गॉग (Vincent Van Gogh),
- जॉर्जेस सेरात (George Seurat),
- तोलुस लोत्रेक (Toulouse Lautree),
- हेनरी रुसो (Henri Rousseau),
उत्तर प्रभाववाद (Post Impressionism) व नयीं कला धाराएँ
- प्रभाववाद या उत्तर प्रभाववाद की कला ने कला को कई नयी विविध कला धाराओं में पनपने का अवसर दिया।
- इस कला आंदोलन की सबसे ख़ास बात यह है कि इस आंदोलन के चित्रकारों ने लगातार नए-नए प्रयोग व अध्ययन किये।
- परिणाम स्वरूप नव प्रभाववाद का उदय हुआ।
- इसके बाद नयी कला धाराओं में घनवाद, अभिव्यंजनावाद, प्रतिकवाद, फाववाद आदि को विकसित होने का अवसर मिला।
- चित्रकारों की कला से जो नयी कला धाराएँ निकलीं उनको हम इस तालिका के ज़रिए देख सकते हैं:
| चित्रकार | कला शैली |
| पॉल सेजान | घनवाद |
| वान गॉफ़ | अभिव्यंजनावाद |
| हेनरी रुसो | अतियथार्थवाद |
निष्कर्ष
उत्तर प्रभाववाद का जन्म प्रभाववाद की कला के विरोध से हुआ है। विद्वानों का मानना है कि वो सभी कला धाराएँ जो प्रभाववाद के विरोध में पनपी, वे सभी उत्तर प्रभाववाद की कला की मानी गईं। रंगों के वैज्ञानिक विश्लेषण स लेकर विषयवस्तु के महत्व के लिए चित्रकारों ने लगातार प्रयास किए। उनके प्रयास रंग भी लाए जिससे की नयी-नयी कला धाराओं को प्रेरणा मिली। सच मायनों में उत्तर प्रभाववाद ने या कहें तो पूरे प्रभाववादी कला आंदोलन ने आधुनिक कला को नया मार्ग दिखाया।
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