High Renaissance Art

High Renaissance Art in Italy | इटली में चरम पुनर्जागरण की कला

यूरोप की कला में 14 से 16 वीं सदी के मध्य, प्रारंभिक पुनर्जागरण कला(Early Renaissance) का दौर कला इतिहास का बहुत ही ख़ास दौर था। हम कह सकते हैं कि यह यूरोप की कला का स्वर्ण काल था। प्रारंभिक पुनर्जागरण कला(Early Renaissance) के विषय में हम पिछले लेख में कर चुके हैं। इसके काल के बाद इसी का और विकसित रूप या अधिकतम उन्नत रूप हमें चरम पुनरुत्थान की कला (High Renaissance Art) में देखने को मिलता है।

चलिए इस लेख में हम चरम पुनरुत्थान की कला (High Renaissance Art) के विषय में विस्तार से समझते हैं:

  • परिचय
  • पृष्ठभूमि
  • चरम पुनरुत्थान की कला क्या है?
  • प्रारंभिक और हाई पुनर्जागरण कला में अंतर
  • विशेषताएँ
  • प्रमुख कलाकार
  • प्रसिद्ध चित्रकृतियाँ
  • निष्कर्ष

High Renaissance Art
Michelangelo’s Painting in the Sistine Chapel

परिचय

  • चरम पुनरुत्थान की कला (High Renaissance Art) यूरोप के कला इतिहास का स्वर्णिम काल था।
  • प्रारम्भिक पुनरुत्थान की कला के बाद चरम पुनरुत्थान की कला अपनी परिपूर्णता के लिए जानी जाती है।
  • कला को संतुलन, परिप्रेक्ष्य और यथार्थवाद की ऊँचाइयों तक पहुँचाया गया।
  • चरम पुनरुत्थान की कला (High Renaissance Art) ने उच्चतम मानकों को प्राप्त किया।
  • लगभग 1490 से 1527 ई. तक की अवधि, चरम पुनरुत्थान की कला (High Renaissance Art) की मानी जाती है।
  • कलाकारों ने मानव शरीर, प्रकृति, भावनाओं और धार्मिक विषयों को अत्यंत सुंदर और वैज्ञानिक ढंग से चित्रित किया।
  • इस युग की कला में सौंदर्य, संतुलन, गहराई और आदर्श मानव रूप का विशेष महत्व था।

प्रष्ठ-भूमि

चरम पुनरुत्थान की कला से पहले इटली में प्रारंभिक पुनरुत्थान की कला (Early Renaissance) का विकास हो चुका था। प्रारंभिक पुनर्जागरण (Early Renaissance) यूरोप के इतिहास का वह महत्वपूर्ण काल रहा। प्रारंभिक पुनर्जागरण में कलाकार, मध्यकालीन (Medieval) कला की सीमाओं से बाहरनिकले।

इन कलाकरों ने विज्ञान और यथार्थवाद (Realism) को अपनाना। इस दौर में कला में मानव जीवन, प्रकृति और भावनाओं को अधिक वास्तविक तरीके से दिखाया जाने लगा। फ्लोरेंस, रोम और वेनिस जैसे शहर कला और संस्कृति के प्रमुख केंद्र बन गए थे।
रोमन और यूनानी शास्त्रीय कला से प्रेरणा लेकर कलाकारों ने मानवतावाद (Humanism) को अपनाया।

इस काल में चर्च और धनी परिवारों, समाज व सम्पन्न परिवारों ने कलाकारों को संरक्षण दिया। इसी कारण महान कलाकारों को बड़े स्तर पर काम करने का अवसर मिला।

चरम पुनरुत्थान की कला क्या है?

  • चरम पुनरुत्थान की कला, प्रारम्भिक पुनरुत्थान कला का पूर्ण विकसित रूप है।
  • चरम पुनरुत्थान की कला में यूनानी दर्शन, इटालियन बुद्धि, ईसाईयत, तथा वास्तविक दुनिया के व्यावहारिक ज्ञान को मिलाया गया।
  • इस काल में धर्म का भी सम्मान हुआ व सौंदर्य को भी विशेष स्थान मिला।
  • यह एक ऐसा दौर था जिसमें बुद्धि को सबसे प्रधान माना गया।
  • इसके बाद कला में नैतिकता व धर्म को वरीयता मिली।
  • कलाकारों का मुख्य उद्देश्य आदर्श सौंदर्य और पूर्ण संतुलन को प्राप्त करना था।
  • कलाकारों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मानव शरीर का अध्ययन किया।
  • परिणामस्वरूप कला कृतियों में वास्तविकता और भावनात्मक गहराई दिखाई गई।
  • रोम इस काल का प्रमुख कला केंद्र बना। यहाँ पोप जूलियस द्वितीय ने कई महान कलाकृतियों का निर्माण करवाया।

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प्रारंभिक और चरम पुनर्जागरण कला में अंतर

प्रारंभिक पुनरुत्थान की कला चरम पुनरुत्थान की कला
कला में प्रयोग और खोज पर जोर
Perspective का प्रारंभिक उपयोग
आकृतियाँ थोड़ी कठोर
भावनाएँ सीमित
मुख्य केंद्र फ्लोरेंस
कलाकार तकनीक सीख रहे थे
कला में पूर्णता और संतुलन
Perspective का परिपूर्ण उपयोग
आकृतियाँ अधिक प्राकृतिक और जीवंत
गहरी और शांत भावनाएँ
मुख्य केंद्र रोम
कलाकार तकनीक में निपुण हो चुके थे

विशेषताएँ

  • संतुलन और सामंजस्य— चरम पुनरुत्थान की कला के चित्रों की ग़ज़ब तरीक़े से बनाए गए हैं। इनकी रचना बहुत ही संतुलित होती थी, व चित्र में विषय वस्तुओं में सामंजस्य देखने को मिलता है।
  • यथार्थवाद (Realism)-चरम पुनरुत्थान की कला के चित्रों में मानव शरीर और प्रकृति को वास्तविक रूप में दर्शाया गया। वैसे भी चरम पुनरुत्थान की कला में मानव शरीर को बनाने में सबसे उच्च कोटि का काम हुआ है।
  • Perspective का उत्कृष्ट प्रयोग— इस युग में परिप्रेक्ष्य का उच्च कोटि का प्रयोग किया गया था। परिप्रेक्ष्य के प्रयोग में गहराई और दूरी को वैज्ञानिक तरीके से दर्शाया गया।
  • प्रकाश और छाया (Light & Shadow)- इस काल के चित्रों में depth और drama पैदा करने के लिए chiaroscuro तकनीक का उपयोग किया गया। चरम पुनरुत्थान की कला के चित्रों में छाया-प्रकाश का इस्तेमाल बहुत ही ख़ास तरीक़े से किया गया है।
  • आदर्श सौंदर्य—इस काल में मानव आकृतियों को चित्रों में सुंदर और आदर्श रूप में प्रस्तुत किया गया। चरम पुनरुत्थान के सभी चित्रों में आकृतियों में ग़ज़ब का सौंदर्य देखने को मिलता है।

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High Renaissance's Raphael School of Athens
High Renaissance’s Raphael School of Athens

प्रमुख कलाकार

  • Leonardo da Vinci
  • Michelangelo
  • Raphael
  • Titian

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प्रसिद्ध चित्रकृतियाँ (Notable Paintings)

  • Mona Lisa—यह विश्व की सबसे प्रसिद्ध व्यक्तिचित्र (Portrait painting) है जो अपनी रहस्यमयी मुस्कान के लिए जानी जाती है। यह पेंटिंग लीयनार्डो-द-विंची की विश्व-प्रसिद्ध पेंटिंज़ में से एक है।
  • The Last Supper- यह पेंटिंग भी लीयनार्डो-द-विंची की विश्व-प्रसिद्ध पैंटिंग है लीयनार्डो-द-विंची की विश्व-प्रसिद्ध इस पैंटिंग में यीशु और उनके शिष्यों का प्रसिद्ध देखाया गया है। यह पेंटिंग दिवार पर बनी एक भित्तिचित्र।
  • The School of Athens- यह पेंटिंग राफेल द्वारा बनाया गया एक भित्तिचित्र (fresco) है। इसे 1509 और 1511 के बीच बनाया गया था। वास्तव में, यह चित्र पोप जूलियस II के एक आदेश पर बनाया गया था। यह भित्तिचित्र प्राचीन गणितज्ञों, दार्शनिकों और वैज्ञानिकों के एक समूह को दर्शाता है। इसके केंद्र में प्लेटो और अरस्तू को दिखाया गया है। जिन लोगों की पहचान आमतौर पर की गई है, उनमें सुकरात, पाइथागोरस, आर्किमिडीज़, हेराक्लिटस, इब्न रुश्द , यूक्लिड और ज़राथुस्त्र शामिल हैं। ख़ासतौर पर यह भी माना जाता है कि लियोनार्डो दा विंची और माइकल एंजेलो को क्रमशः प्लेटो और हेराक्लिटस के रूप में चित्रित किया गया है। जबकि राफेल ने टॉलेमी के ठीक बगल में अपना स्वयं का एक चित्र (self-portrait) भी शामिल किया है।
  • Sistine Chapel Ceiling- वेटिकन चर्च की छत पर बनी अद्भुत चित्रकला

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निष्कर्ष

चरम पुनरुत्थान की कला, यूरोपीय कला इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली काल माना जाता है। इस युग की कला में तकनीकी, सौंदर्य और मानव भावनाओं की अभिव्यक्ति—इनमें से प्रत्येक में उत्कृष्टता है।आरम्भिक पुनरुत्थान की कला से ले कर चरम पुनरुत्थान की कला तक के सफ़र में, कला ने जो उपलब्धि हासिल की, वो अद्वितीय है। सही मायने में कला इतिहास के सभी कालों में से ये काल ऐसा है जिसकी कला की उत्कृष्टता को ले कर किसी को भी कोई संदेह नहीं है।

इस समय बनयी गयीं कला कृतियाँ आज भी कलाकारों के लिए प्रेरणाश्रौत हैं। आज भी कलाप्रेमी इस काल की कला व कलाकरों को अपना आदर्श मानते हैं। लीयनार्डो द विंची, मायकलैंजेलो और रैफ़ेएल जैसे कलाकर लगातार कला जगत को अपने उच्च कोटि के कामों से प्रेरित करते आ रहें है। इन दिग्गजों की बनाई गई पेंटिंगें हमेशा के लिए कला जगत की मास्टरपीस हैं।

इस लेख पर आधारित पूरा विडीओ भी देखें

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