early renaissance art in italy

Early Renaissance Art in Italy | इटली में प्रारंभिक पुनर्जागरण की कला

यूरोप की कला की दुनिया में 14 से 16 वीं सदी के मध्य एक ऐसा वक़्त आया, जिसने कला जगत की पूरी सोच ही बदल रख दी? जहाँ कला सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने इंसानों को, प्रकृति को और भावनाओं को असली शक़्ल में देखना शुरू कर दिया था।

इस क्रांति को कहा जाता है – Early Renaissance यानी प्रारंभिक पुनर्जागरण कला। यह दौर कला इतिहास का बहुत ही ख़ास दौर था और हम कह सकते हैं कि यूरोप की कला का ये गोल्डन एज यानी की स्वर्ण काल था। आख़िर ऐसा क्या था, कौन-कौन से प्रयोग हुए थे, और क्यों ये पीरियड इतना महत्वपूर्ण है? आइए जानते हैं इस लेख में :

  1. परिचय
  2. पुनर्जागरण (Renaissance) क्या है?
  3. प्रारंभिक पुनर्जागरण
  4. क्वॉट्रोसेंटरो (Quatro Centro)
  5. प्रष्ठ-भूमि
  6. मुख्य विशेषताएँ
  7. गोथिक की कला और पुनर्जरण की कला
  8. प्रमुख कलाकार
  9. पुनरुत्थान की कला का प्रभाव
  10. निष्कर्ष

Early Renaissance art in Italy
The Birth of Venus_by_Sandro_Botticelli

परिचय

क्या आप जानते हैं कि यूरोप की कला की दुनिया में 14 से 16वीं सदी के मध्य एक ऐसा वक़्त आया, जिसने कला जगत की पूरी सोच ही बदल रख दी? जहाँ कला सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं रही… बल्कि इसने इंसानों, प्रकृति और भावनाओं को असली शक़्ल में देखना शुरू कर दिया था। इस क्रांति को कहा जाता है – Early Renaissance यानी प्रारंभिक पुनर्जागरण कला। यह दौर कला इतिहास का बहुत ही ख़ास दौर था और हम कह सकते हैं कि यूरोप की कला का ये गोल्डन एज यानी की स्वर्ण काल था।

आख़िर ऐसा क्या था, कौन-कौन से प्रयोग हुए थे, और क्यों ये पीरियड इतना महत्वपूर्ण है? आइए जानते हैं इस विडीओ में,

पुनर्जागरण (Renaissance) क्या है?

पुनर्जागरण (Renaissance) का अर्थ है— “पुनः जन्म” या “नवजागरण”। यह यूरोप के इतिहास का एक महत्वपूर्ण काल था जो लगभग 14वीं से 17वीं शताब्दी के मध्य रहा। इसमें कला, साहित्य, विज्ञान और ज्ञान का फिर से विकास हुआ।

दूसरे शब्दों में कहें तोपुनर्जागरण वह समय था जब लोगों ने पुरानी (प्राचीन ग्रीक और रोमन) ज्ञान और कला को दोबारा अपनाया और नई सोच के साथ आगे बढ़ाया।इसका केंद्र मुख्य रूप से Florence (इटली) था जो आगे चल के पूरे यूरोप में फैल गया।

प्रारंभिक पुनर्जागरण

ये यूरोप के इतिहास का वह महत्वपूर्ण काल है, जो लगभग 14वीं से 15वीं शताब्दी के बीच विकसित हुआ और जिसका केंद्र Florence (इटली) था।

पुनर्जागरण वह समय था जब कलाकारों ने मध्यकालीन (Medieval) कला की सीमाओं से बाहर निकलकर नई सोच, विज्ञान और यथार्थवाद (Realism) को अपनाना शुरू किया। इस दौर में कला में मानव जीवन, प्रकृति और भावनाओं को अधिक वास्तविक तरीके से दिखाया जाने लगा। इस समय कला, विज्ञान और विचारों में एक नई जागरूकता आई।

संक्षेप में, प्रारंभिक पुनर्जागरण ने कला को अधिक वैज्ञानिक, वास्तविक और मानवीय बनाकर आगे आने वाले स्वर्णिम पुनर्जागरण काल की मजबूत नींव रखी।

क्वॉट्रोसेंटरो (Quatro Centro)

प्रारंभिक पुनर्जागरण की कला का मूल आधार प्राचीन कला के अध्ययन, तर्क,और स्वतंत्र विचारों से लिया गया था। इस कला ने मानुष को अपने केंद्र में रखा। अतः इस प्रकार कला  बेजानटाइन (byzantine) कला की कठोरता से बाहर निकली। धार्मिक विषय भी मानवीय दृष्टि से अंकित किए जाने लगे। यह परिवर्तन सबसे पहले जीओत्तो (Giotto) में दिखाई दिया।

कई वर्षों तक जीओत्तो (Giotto) की कला की अनुकृतियाँ होती रहीं। 15वीं सदी के आरंभ में इस प्रवृत्ति को अपनाने में सबसे आगे मासाच्चियो (Masaccio) था। पुनर्जागरण की कला के इन्हीं आरम्भिक 25 सालों को क्वॉट्रोसेन्टो (Quattrocento) कहा जाता है।

प्रष्ठ-भूमि

14वीं सदी में इटली में जहां एक तरफ़ राजनैतिक अस्थिरता थी। वहीं दूसरी तरफ़ व्यापार एवं कलाओं की भी तरक़्क़ी हो रही थी। पूर्वी देशों से रेशम व मसालों का व्यापार इटली डॉक्टर ही होकर बाक़ी यूरोप में जाता था।

इसी समय इटली के पाँच नगर-राज्यों ने खुद को मज़बूत बनाया। इन राज्यों ने युद्ध की संभावनाओं को कम करने के लगातार प्रयास किए। इन राज्यों ने छोटे-छोटे क्षेत्रों को अपने प्रभाव में रखा, धन सम्पत्ति को संचित किया। ये पाँच नगर राज्य थे- मिलन, वेनिस, फ़्लॉरेन्स, नेपिल्स और पेपल।

अतः इस स्थिति में कला भी इन राज्यों तक ही सीमित रही। राजकीय दरबार, व अधिकारी कला के नए संरक्षक बने। लोगों की भाषा, दर्शन एवं प्राचीन साहित्य में रुचि जागी। ज़ाहिर सी बात है कि इन सब बातों का कलाओं पर गहरा प्रभाव पड़ा।

मुख्य विशेषताएँ

1. यथार्थवाद (Realism):

रोमनस्क व गोथिक शैली से कला बाहर निकली। चर्च व ईसाईयत के बंधनों से मुक्त हो कर कला को मानव व प्राकृति के रूप में नए विषय मिले। कलाकारों ने इंसान और वस्तुओं को चित्रों में अधिक प्राकृतिक और यथार्थवादी दिखाना शुरू किया। ये पहली बार था कि इस क़िस्म का प्रयोग कला में किया गया हो।

2. परिप्रेक्ष्य (Perspective):

पुनर्जागरण (Renaissance) की कला परिप्रेक्ष्य के प्रयोग के लिए भी जानी जाती है। तीन-आयामी (3D) प्रभाव देने के लिए वैज्ञानिक नियमों का उपयोग किया गया। इस तकनीक को विकसित करने में Filippo Brunelleschi का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

3. मानवतावाद (Humanism):

इसी समय लोगों में व्यक्तिवाद के प्रति जागरूकता आयी। लोगों में श्रेष्ठ व सुसंस्कृत मनुष्य की भावना व्यक्तिगत उपलब्धियों को महत्व देना शुरू कर दिया। 15वीं सदी के इटली का फ़ैशन का बोल-बल हो गया था। अतः कला का केंद्र धार्मिकता से हटकर मानव और उसके अनुभवों की ओर केंद्रित हुआ।

4. प्रकाश और छाया (Light & Shadow):

पुनरुत्थान की कला उच्च आदर्शवादी शस्त्रियता से युक्त है। अतः रंग संयोजन में भी पूर्णता है। रंगों के माध्यम से चित्रों में गहराई और यथार्थ लाने के लिए प्रकाश-छाया का शानदार उपयोग हुआ। छाया प्रकाश के नाटकीय संयोजन से चित्रों में यथार्थवादी प्रभाव व वास्तविकता लायी गयी।

गोथिक की कला और पुनर्जरण की कला

पुनर्जागरण की कला गोथिक कला के बाद विकसित हुई। चलिए देखते हैं दोनो कलाओं में क्या-क्या अंतर है :

  • गोथिक कला भवन निर्माण कला की कला थी जिसमें चित्रकला व मूर्ति कला सिर्फ़ आंतरिक शोभा बढ़ने के लिए थी।
  • जबकि पुनरुत्थान की कला चित्रकला व मूर्ति कला को स्वतंत्रता मिली। इनको स्वतंत्र कला के रूप में माना गया।
  • गोथी काल में आकृतियाँ छोटी बनाईं जाती थीं, जबकि पुनरुत्थान की कला में विशाल आकृतियाँ बनाई जाने लगीं।
  • गोथिक कला में आकृतियों की मुद्राएँ, वस्त्रों की सुकड़न व सीमा रेखायें ऊपर को जाती हुई प्रतीत होती थीं।
  • जबकि पुनरुत्थान की कला में क्षेतिजयी गति आई।
  • गोथिक काल में कलाकरों को चर्च का ही सहारा था जबकि पुनरुत्थान की कला में कलाकरों को सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई।
  • गोथिक कला में रेखांकन और रंगों का अलग-अलग महत्व नहीं था। ये दोनों एक ही माने जाते थे।
  • किंतु पुनरुत्थान की कला में इन दोनों को अलग अलग रूपों में मान्यता व महत्व मिला।
  • परिप्रेक्ष्य के प्रयोग में पुनरुत्थान की कला ज़्यादा वैज्ञानिक थी। जबकि गोथिक कला में इसका कोई महत्व नहीं था।
  • तैल रंग माध्यम गोथिक की अपेक्षा पुनरुत्थान की कला में अधिक लोकप्रिय हुआ।
  • गोथिक काल में चित्रकला के नियम धर्म के अनुसार थे। पुनरुत्थान की कला में उनको धर्म से आज़ादी मिली।

प्रमुख कलाकार

  • Masaccio – यथार्थवाद और परिप्रेक्ष्य के लिए प्रसिद्ध
  • Donatello – मूर्तिकला में नई जान डाली
  • Fra Angelico – धार्मिक चित्रों में भावनात्मक गहराई

पुनरुत्थान की कला का प्रभाव

  • प्रारंभिक पुनर्जागरण ने कला, साहित्य एवं वास्तुकला को बहुत पभावित किया।
  • यह प्रभाव इतना गहरा है कि आज भी कलाप्रेमी इस काल की कला का लोहा मानते हैं। 
  • यह एक ऐसा युग था जो शास्त्रीय पूर्णता से युक्त था।
  • जिसमें रेखांकन, संयोजन, रंग संयोजन व परिप्रेक्ष्य, सभी में पूर्णता थी।
  • इस कला ने सत्य को सौंदर्य के साथ मिलाकर प्रस्तुत किया।
  • इस कला का आधार मनुष्य को बनाया गया, जिससे इसके पूर्व की कला शैली की कठोरता से कला स्वतंत्र हुई।
  • इस युग की कला का मानववादी होना इसे और भी लोकप्रिय बना गया। अतः व्यक्तिवाद से कला जां जां तक पहुँच सकी।
  • इसने कला को वैज्ञानिक, तार्किक और मानवीय दृष्टिकोण से जोड़ दिया।
  • इस कला ने आगे आने वाली कला शैलियों व आंदोलनों के लिए मार्ग खोला।
  • परिणामसवारूप चरम पुनरुत्थान कला का उदय हुआ और लोगों ने लीओनार्डो द विंची व मायकलैंजेलो जैसे माहन कलाकारों व उनकी कला को देखा।

निष्कर्ष

प्रारंभिक पुनर्जागरण कला का वह समय था जब कला चर्च व धर्मिल बंधनों से आज़ाद हुई। प्राचीन शास्त्रीय नियमों के साथ, सत्यता, व्यक्तिवाद व वैज्ञानिकता को मिला के कला कर्म किए गए। जिसका नतीजा ये हुआ कि दुनिया ने अद्भुत व अद्वितीय कलाकृतियाँ देखीं। इस युग ने कला को एक नई दिशा दी, जहाँ कला केवल धार्मिक नहीं रही, बल्कि जीवन की सच्चाई और सुंदरता को दिखाने का माध्यम बन गई।

आगे चल के चरम पुनरुत्थान की कला में लीओनार्डो द विंची व मायकलैंजेलो ने इसमें नए आयाम जोड़े। वास्तव में पुनरुत्थान की कला यूरोप की कला का स्वर्णिम युग है। क्या आपको भी पुनरुत्थान की कला का ये काल स्वर्णिम काल लगता है? कॉमेंट कर के ज़रूर बताएँ।


Related Posts

Spread the love

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!