जर्मन में के अभिव्यंजनावाद की कला के विकास में दो कलाकार ग्रूपों का योगदान रहा था। उन दो ग्रूपों में से एक द ब्लू राइडर (The Blue Rider) है जो सबसे जयदा लोकप्रिय राहा है। द ब्लू राइडर कलाकार समूह (The Blue Rider Art group) ने (ऐब्स्ट्रैक्ट) अमूर्त कला के विकास में अहम भूमिका निभाई।
इसके अलवा इस ग्रूप में कला के साथ अन्य कलात्मक विधाओं व अन्य ग़ैर कलात्मक तत्वों या साधनों के भी साथ समन्वय किया। इस ग्रूप में रूस व जर्मन कलाकरों ने मिल कर काम किया। द ब्लू राइडर (डेर ब्लाउ राइटर) आधुनिक एक्सप्रेशनिस्ट कलाकारों का एक अनौपचारिक ग्रुप था।
प्रष्ठ-भूमि
- इस ग्रूप की गतिविधियों व शुरुआत का केंद्र जर्मनी रहा।
- ब्लू राइडर की अनोपचारिक शुरुआत 1909 में म्यूनिख के नए कलाकारों का एसोसिएशन बनने के साथ हुई।
- अपने समय के हिसाब से यह एसोसिएशन काफी विकसित व रचनात्मक था ।
- इसने मैरिएन वेरेफ़किन (Marianne Werefkin) और एलिज़ाबेथ एपस्टीन (Elisabeth Epstein) जैसी महिला कलाकारों को भी ग्रूप में शामिल किया।
- इसमें थॉमस वॉन हार्टमैन (Thomas von Hartmann) जैसे म्यूज़िशियन और फ्री मूवमेंट परफॉर्मर अलेक्जेंडर सखारोफ़ (Alexander Sacharoff) भी शामिल हुए।
- पहले अकेले काम करने वाले कलाकार जैसे पॉल क्ली, फ्रांज मार्क और रॉबर्ट डेलाउने ने 1911 से कम्युनिटी के दूसरे सदस्यों के साथ रचनात्मक सम्बंध बनाए।
- इन्हीं कलात्मक व रचनात्मक सम्बन्धों ने ही आगे चल के इसी साल ब्लू राइडर ग्रुप के गठन का काम किया।
द ब्लू राइडर (The Blue Rider) का गठन
- द ब्लू राइडर कलाकार समूह का गठन वासिली कैंडिंस्की (Wassily Kandinsky)और फ्रांज मार्क (Franz Marc)ने 1912 में जर्मनी में किया था।
- इसकी स्थापना कलात्मक एवं साहित्यिक गतिविधियों के लिए किया गया था।
- जर्मनी का ये ग्रूप कोई सुनियोजित आंदोलन नहीं था।
- बल्कि यह एक ढीला-पोला सा संगठन था जिसने एक उदेशय को ध्यान में रख कर अपनी व्यक्तिगत शैलियाँ विकसित की।
- 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के कारण ये कलाकार ग्रूप टूट गया और समाप्त हो गया।
ग्रूप का नाम व अन्य कलाकरों का साथ
- द ब्लू राइडर का नाम ब्लू राइडर क्यूँ पड़ा? माना जाता है कि फ्रांज मार्क को घोड़ों से व वासिली कैंडिंस्की को घोड़सवारों से लगाव था।
- साथ ही दोनो को नीले रंग के प्रति विशेष आकर्षण था। दोनों ही कलाकार नीले कलर को शुद्ध व आध्यात्मिक मानते थे। इसी वजह से इस ग्रूप का नाम द ब्लू राइडर पड़ा।
- सभी कलाकार अलग अलग कला शैलियों के थे फिर भी वो सब एक साथ आए। कारण सिर्फ़ एक था कि कला आध्यात्मिक है।
- यह इंसानियत को उसके अकेलेपन से ठीक कर सकती है।
- यह 20वीं सदी की शुरुआत में यूरोप में उबलते गुस्से और तनाव को दूर कर सकती है। कला लोगों को उनकी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने का एक तरीका थी।

गतिविधियाँ
- 1912 में ही वासिली कैंडिंस्की (Wassily Kandinsky)और फ्रांज मार्क (Franz Marc)ने एक यार बुक प्रकाशित की।
- इस ईयर बुक का नाम द ब्लू राइटेर अलमान्स था जिसमें कला सम्बन्धी लेखों को प्रकाशित किया गया।
- इस ईयर बुक का प्रकाशन वर्ष 1912, 1913, तथा 1914 में हुआ।
- इस ग्रूप ने 1911 से 1914 तक सामूहिक कला प्रदर्शनियाँ कीं।
- इसके बाद जर्मन और अन्य यूरोपीय शहरों में यात्रा प्रदर्शनियाँ हुईं।
- ब्लू राइडर 1914 में पहले विश्व युद्ध की शुरुआत में खत्म हो गया।
उद्देश्य
- इस ग्रूप के कलाकरों का एक मात्र उद्देश्य कला में अधायतमिक व भावनात्मक अभिव्यंजना को देखना था।
- इसी उद्देश्य की वजह से सब मिल कर एक साथ काम करने का का प्रयास कर रहे थे।
- इस ग्रुप का मकसद कला के भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं पर काम करना था।
- इस ग्रूप ने कला के विकास को ध्यान में रखकर, दृश्य कला में संगीत के समन्वय का प्रयास किया।
- चित्रण करने को सहज बनाने का प्रयास किया गया।
- रंगों के भावनात्मक तथा प्रतीकात्मक संयोग किया गया।
- बिना किसी पूर्व सोच के आकस्मिक ही चित्रण करने का दृष्टिकोण पर विश्वास किया गया।
- अतः इस ग्रूप की सबसे बड़ी देन अमूर्त कला को विकसित करना व उसे प्रोत्साहन देना भी रहा है।
- इसमें आमूर्त कला, प्रतिकवाद जैसी कलाओं पर आत्माभिव्यक्ति करने के लिए काम किया गया।
उपलब्धियां
- आधुनिक कला में द ब्लू राइडर के कुछ काम बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहें हैं।
- इस ग्रूप में सही मायने में कला शैली के अलावा भी कई सारी चीजें कला में जोड़े, जो सच में कला को वो आधुनिक कला बनते हैं जैसा कि हम आज देखते हैं।
- ब्लू राइडर ग्रूप ने अलग अलग देशों, संस्कृतियों, मीडिया, व अन्य विधाओं के भी सक्रिय कलाकरों को अपने साथ जोड़ा।
- इस ग्रूप ने रचनात्मक तरीकों की विविधता को अपनाया।
- शायद पहली बार इस ग्रूप ने कला के साथ प्रकाशन व साहित्य को भी जोड़ा।
- द ब्लू राइडर अल्मनैक में प्रकाशित उनके बयानों, लेखों और तस्वीरों ने कला को पारंपरिक सीमाओं से आज़ाद करने और रचनात्मक अभिव्यक्ति को अलौकिक आध्यात्मिक अनुभवों के माध्यम के रूप में बढ़ावा दिया।
- कहा जाता है कि इस ग्रुप का नाम कैंडिंस्की की 1903 की पेंटिंग द ब्लू राइडर से लिया गया है, जो कलाकार की आत्मा की स्वतंत्रता और यात्रा का प्रतीक है।
- रंग, रूप और मीडिया के प्रति अपने नए दृष्टिकोण के माध्यम से, ब्लू राइडर कलाकारों ने यूरोपीय आधुनिक कला के विकास को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया।
- ब्लू राइडर कलाकारों ने यूरोपीय कला जगत के आर्थिक और आलोचनात्मक माहौल में अपने आप को स्थापित किया।
- उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया और साथ ही मोनोग्राफिक शो भी आयोजित किए।
- इन लोगों ने लेखक और गैलरी मालिक के साथ सहयोग से अपनी कला को कला बाज़ार तक पहुँचाया।
- उन्होंने म्यूज़ियम क्यूरेटर, लेखकों और शिक्षा सिद्धांतकारों के साथ संबंध स्थापित किए।
- सारांश में कहें तो जो कला का व्यवसायकीकरण हम आज देखते हैं उसकी शुरुआत इस ग्रूप ने की।
ग्रूप का अंत
- 1914 में पहले विश्व युद्ध के शुरू होने के साथ ही यह समूह बिखर गया।
- फ्रांज मार्क (Franz Marc) और ऑगस्ट माके (August Make) युद्ध संघर्ष में मारे गए।
- 1933 से जर्मन नाज़ी पार्टी द्वारा आधुनिक कलाकारों को भी सताया गया, और कई लोगों को दूसरी जगहों पर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
- अतः रूसी चित्रकार- वासिली कैंडिंस्की (Wassily Kandinsky), यालेंस्की (Jawlensky) मैरिएन वेरेफ़किन (Marianne Werefkin) को जर्मन से जाना पढ़ा।
- दूसरे विश्व युद्ध के बाद, ब्लू राइडर की कृतियाँ 1955 में जर्मनी के कैसल में डॉक्यूमेंटा प्रदर्शनी के पहले संस्करण में दिखाई दीं।
- युद्ध के बाद के कला समुदायों में जटिल सांस्कृतिक संबंधों के उत्सव के रूप में, इसने आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों पर समूह के स्थायी प्रभाव को भी सुनिश्चित किया।
निष्कर्ष
- डेर ब्लाउ राइटर से जुड़े कलाकार 20वीं सदी की मॉडर्न आर्ट के महत्वपूर्ण किरदार थे।
- उन्होंने अन्य कलाकरों व संसाधनो के साथ रिश्तों का एक कमजोर नेटवर्क बनाया।
- इन जुड़े हुए कलाकारों के काम को जर्मन एक्सप्रेशनिज़्म में गिना जाता है।
- १९२३ में कैंडिंस्की फिर से जर्मनी आये और फेनिंजर, पॉल क्ली और यालेंस्की ने मिलकर डाई ब्लू वेर (Die blue vier) या The blue four कलाकार मंडल स्थापिय किया







