इतिहास के सबसे शक्तिशाली और भावनात्मक रूप से आवेशित कला आंदोलनों में से एक अभिव्यंजनावाद की कला (Expressionism Art) है। अगर आपने कभी किसी पेंटिंग को देखकर अपने अंदर एक अजीब सी हलचल या गहरी भावना महसूस की है, तो समझ लीजिए कि आपका सामना अभिव्यंजनावाद (Expressionism) की रूह से हुआ है।
इस लेख में हम आगे अभिव्यंजनावाद की कला (Expressionism Art) के बारे में हम विस्तार से चर्चा करने वाले हैं।
- परिचय
- अभिव्यंजना का अर्थ
- प्रष्ठ-भूमि
- संक्षिप्त इतिहास
- विशेषताएँ
- निष्कर्ष

परिचय
अभिव्यंजनावाद की कला (Expressionism Art) एक ऐसी कला शैली या आंदोलन है जो अपनी कृतियों में व्यक्तिपरक भावनाओं पर ज़ोर देती है। यह अपने समय से पहले व अपने समय की अन्य चित्रकला शैलियों के विपरीत है । यह 20वीं शताब्दी के आरंभिक कलाकारों द्वारा देखी जा रही बदलती दुनिया की भी प्रतिक्रिया थी।
यह कला आंदोलन इतना व्यापक है कि इसे आंदोलन कहना शायद उचित न हो। यह कला, अगर कुछ और नहीं तो, एक शैली, एक युग और, अगर मैं थोड़ा साहस दिखाऊं तो, एक दृष्टिकोण है।
इस कला आंदोलन में दो प्रसिद्ध ग्रुप भी शामिल हैं। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अभिव्यंजनावाद कला यूरोप में उभर रहा था। यह मुख्य रूप से फ्रांस और जर्मनी में केंद्रित था, लेकिन अन्य देशों ने भी इसे अपनाया।
अभिव्यंजनावाद (Expressionism) का अर्थ
अभिव्यंजनावाद (Expressionism) का शाब्दिक अर्थ मन की भावनाओं को व्याप्त करना है। कलाकारों ने अपनी भावनाओं को चित्रों में देखाने का प्रयास किया। उन्होंने तय किया कि वे अब वह नहीं पेंट करेंगे जो वे देखते हैं, बल्कि वह पेंट करेंगे जो वे महसूस करते हैं। एक्सप्रेशनिस्ट कलाकारों ने बाहरी दुनिया को दिखाने के बजाय आंतरिक अनुभवों को दिखाने की कोशिश की। उन्होंने भावनाओं को गहराई से दिखाने के लिए वास्तविकता से तोड़-मरोड़ भी की।
प्रष्ठ-भूमि
- 20वीं सदी की शुरुआत कई कारणों से उथल-पुथल भरी थी।
- औद्योगीकरण, भीड़भाड़ वाले शहर और प्रथम विश्व युद्ध की आहट ने समाज को बैचेन सा कर दिया था।
- कलाकार व साहित्यकार भी समाज के इस दबाव और मोहभंग को महसूस कर रहे थे।
- वे आधुनिक जीवन के खालीपन के खिलाफ विद्रोह कर रहे थे।
- वे चाहते थे कि उनकी कला एक चीख हो, एक पुकार हो, एक सीधा इमोशनल बयान हो।
- उन्होंने इस आंतरिक भावनाओं को सीधे अपनी कला में उतार दिया।
- अभिव्यंजनावाद सिर्फ़ कला तक सीमित नहीं था अपितु साहित्य व सिनेमा में भी इसका प्रभाव पड़ा।
- अतः कलाकार इस अशांति से उबरने के लिए कल्पना, प्रतिभा के तहत मौलिकता की ओर आकर्षित हुए।
- उन्होंने भौतिक अभिव्यक्ति की अपेक्षा भावनात्मक अभिव्यंजना यानी की अभिव्यक्ति कूँ चुना।
- इसका परिणाम ये हुआ कि इस प्रगति से फ़्रांस में फ़ॉववाद का जन्म हुआ और जर्मन में अभिव्यंजनावाद का।
संक्षिप्त इतिहास
वैसे तो अभिव्यंजनावाद शब्द का प्रयोग 1850 ई. के लगभग होने लगा था। इस कला आंदोलन की प्रेरणा वान गो व मंच के की कला से ली गयी है। 1883 में अडवर्ड मुंख (Advard Munch) के वुड्कट कलाकृति द स्क्री अभिव्यंजनावाद की सबसे सशक्त कृति थी। इस कलाकृति ने कई कलाकारों को प्रभावित किया। इस कृति में मुंख ने चीख को पूरे चित्र में देखाया जो उस समय किसी भी कलाकृति से अलग व अनोखा था।
इसके बाद जूलियन आगस्टे हर्वे ने अपने चित्रों के लिए अभिव्यंजनवाद शब्द का इतेमाल किया अपनी एक प्रदर्शनी में किया। इसके बाद भी कला समीक्षों के द्वारा कुछ प्रदर्शनियों के चित्रों के लिए ये नाम उल्लेखित होता रहा। १९१० में हेरवर्थ वॉल्डेन (Herwarth Walden) ने द स्टॉर्म (Der Sturm) पत्रिका प्रकाशित करना प्रारम्भ भी। हेरवर्थ वॉल्डेन (Herwarth Walden) एक जर्मन अभिव्यंजनवादी चित्रकार, संगीतकार, कला समीक्षक,लेखक, सम्पादक, व कला दीर्घा के मालिक थे।
इन्होंने अपनी पत्रिका में आदर्शवाद, यथार्थवाद व प्रभाववाद से अलग जो काम हो रहे थे उन्हें अभिव्यंजनावादी कहना प्रारम्भ कर दिया था। नर्वे के प्रतिकवादी चित्रकार अडवर्ड मुंख (Advard Munch) को अभिव्यंजनावाद का अग्रदूत माना जाता है।
इनके अन्य कलाकरों की बात करे तो इनमें वासिली कैंडिंस्की, अर्न्स्ट लुडविग किर्चनर और एगॉन शीले जैसे प्रमुख कलाकार शामिल हैं। अभिव्यंजनावाद की कला के विकास में तीन कलाकार ग्रूप समूह का भी महत्वपूर्ण रोल था। ये ग्रूप थे:
- द ब्रिज
- द ब्लू राइडर
- न्यू आब्जेक्टिविटी
न्यू ओबेजकटिवित्य
- न्यू आब्जेक्टिविटी (Neue Sachlichkeit) का उदय जर्मानी में १९२० के दौरान हुआ था।
- यह अभिव्यंजनावाद की भावनात्मकता के प्रति एक प्रतिक्रिया थी।
- इसका उद्देश्य दुनिया को इसकी कटु बुराई के साथ साफ़ और ईमानदार देखना है।
- यह प्रथम विश्व युद्ध के उपरंत उपजे वातावरण के प्रति एक अभिव्यक्ति थी।
- इस दल ने समाज की अन्य बुराइयों को भी उजागर किया।
- इनके कलाकरों ने अपने चित्रों में जीवन की आदर्शवादी विषयवस्तु के मुक़ाबले समाज के कटु सत्य को अपने चित्रण में उकेरा।
- इस दल ने व्यक्तिगत जीवन व उसके संघर्षों पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
विशेषताएँ
- अभिव्यंजनवाद कला अपने पूर्व के कला आंदोलन के विपरीत थी।
- ये आंशिक रूप से नए औद्योगिक और शहरी जगत के प्रति एक प्रतिक्रिया भी थी।
- अभिव्यंजनावादी चित्रकला के क्षेत्र में कलाकारों ने भावनाओं को सर्वोपरि महत्व दिया।
- अभिव्यक्तिवाद कला का प्रभाव व्यापक व सर्वव्यापी है।
- इसने न केवल पारंपरिक कला को बल्कि नाटक, साहित्य और फिल्मों को भी प्रभावित किया है।
- इस कला ने कल्पना के ज़रिए गूढ़ तथा पारलौकिक को खोजने का प्रयास किया।
- अतः आत्म अनुभूति, कल्पना, प्रतिभा व मौलिकता पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया।
- कलाकारों ने जानबूझकर चेहरों और वस्तुओं को विकृत आकृतियाँ, यानी कि टेढ़ा-मेढ़ा, बनाया।
- जिससे कि वे मानसिक उथल-पुथल दिखा सकें।
- जैसा कि एडवर्ड मंच (Edvard Munch) की “द स्क्रीम” (The Scream) को ही देख लीजिए।
- वह इंसानी चीख का वास्तविक चित्र नहीं है, बल्कि अस्तित्व के डर और पीड़ा का एक विजुअल अहसास है।
- इनके चित्रों में गहरे और अप्राकृतिक रंगप्रयोग हुआ है।
- इन कलाकारों ने चमकीले और अक्सर आपस में टकराने वाले (clashing) रंगों का इस्तेमाल किया।
- ये रंग हकीकत दिखाने के लिए नहीं, बल्कि भावनाएं जगाने के लिए थे।
- अगर किसी का चेहरा हरा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह सच में हरा है।
- यह ईर्ष्या, बीमारी या हताशा का प्रतीक हो सकता है।
- असल में रंगों का चुनाव मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने के लिए किया जाता था।
निष्कर्ष
20 वी सदी की आधुनिक कला में अभिव्यंजनावाद का अपना एक अलग स्थान व महत्व है। इसको केवल एक कला शैली कहना या एक आंदोलन कहना सही नहीं होगा। इस कला ने कई प्रकार से आधुनिक कला पर प्रभाव डाला। यह एक ऐसी शैली बन के उभरी जी आज भी कलाकरों को अपने मन की भावनाओं को व्याप्त करने के लिए कला का माध्यम देती है।
इसने प्रिंटिंग या लीनो प्रिंट, वुड्कट प्रिंटिंग व अमूर्त (ऐब्स्ट्रैक्ट) कला जैसे माध्यम दिए जो आज भी प्रचलित हैं। कला में मीडिया, मार्केटिंग, गैलरी व अन्य संसाधनों को मिला के इसका व्यवसायकीकरण हुआ। इन सब कामों में अभिव्यंजनावादी कलाकार ग्रूपों के योगदान विशेष रूप से सराहनीय रहा।
वास्तव में अभियंजनवाद ने आधुनिक कला को व्यवसायक बनाने के साथ-साथ कला अनुभूति का एक नया माध्यम भी बनाया।








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