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Cubism Art (घनवाद की कला)

घनवाद (Cubism) 20वीं सदी की शुरुआत में विकसित हुआ एक क्रांतिकारी कला आंदोलन था। इसको आधुनिक कला की प्रथम अमूर्त शैली के रूप में भी माना जाता है। घनवाद (Cubism)  से पूर्व के कला में आंदोलनों प्रभाववाद, नव प्रभाववाद व उत्तर प्रभाववाद रहे हैं। इसके समकालीन कला आंदोलनों में फाववाद व अभिव्यंजनावाद जैसी कला शैलियाँ रही हैं।

अगर आप ने इनके बारे में नहीं पढ़ा है तो इन्हें ज़रूर पढ़ लें।

{यहाँ इनके लिंक उपलब्ध हैं- अवश्य पढ़े: प्रभाववाद की कला, नव प्रभाववाद की कला, उत्तर प्रभाववाद की कला, क्लोड मोने (Claude Monet)}


  • परिचय
  • प्रष्ठ-भूमि
  • घनवाद क्या है?  (What is Cubism?)
  • उत्पत्त
  • विशेषताएँ (Characteristics)
  • प्रमुख कलाकार (Artists)

प्रारम्भिक जीवन

फोटोग्रफ़ी के अविष्कार हो जाने से यथार्थवादी चित्रण की अहमियत घटने लगी थी। अब कलाकार चीजों को अलग नजरिये से देखने लगे थे। इस घनवाद (Cubism) कला शैली का जनक पिकासो व ब्राक को माना जाता है। जबकि ये कला शैली पॉल सेजां की कला से प्रेरित थी। पहले कलाकार वस्तुओं को पारम्परिक परिप्रेक्ष्य (Perspective) से चित्रित करते थे। मगर इस कला आंदोलन के कलाकरों ने एक ही पारम्परिक परिप्रेक्ष्य (Perspective) को त्याग कर, वस्तु को कई अलग-अलग कोणों से एक साथ दिखाने की कोशिश करते हैं।

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cubism Art
Les Demoiselles d’Avignon_Cubism Art

प्रष्ठ-भूमि

इससे पूर्व उत्तर प्रभाववाद व समकालीन कला आंदोलन जैसे कि जंगलवाद व अभिव्यंजनावाद ने कला व कलाकरों के सोचने व काम करने के तरीक़ों को काफ़ी प्रभावित किया था. घनवाद (Cubism) कला का अविष्कार पिकासो व ब्राक ने फ़्रान्स में किया था। इस कला आंदोलन में सेजां के तत्वों का प्रयोग कर के एक नयी कला शैली को विकसित किया गया। सेजां की कला की अगर बात करें तो सेजां को चित्र में गहराई देखने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। कला की तकनीकी भाषा में कहें तो परिप्रेक्ष्य (Perspective) के पारम्परिक प्रयोग के वो ख़िलाफ़ थे। उन्होंने द्विआयामी चित्रण पर ज़्यादा ज़ोर दिया।

दूसरे शब्दों में कहें तो अब तक चित्रों में 3डी का इतेमाल हो  रहा था। मगर घनवादी कला ने 3D की अपेक्षा 2D में चित्रांकन करने का लक्ष्य बनाया।

घनवाद क्या है?  (What is Cubism?)

क्यूबिज़्म एक ऐसी कला शैली है जिसमें वस्तुओं को ज्यामितीय आकृतियों जैसे घन (Cube), त्रिभुज, आयत, और गोले में तोड़कर प्रस्तुत किया जाता है। इसमें कलाकार वास्तविक वस्तु को बिल्कुल वैसा नहीं दिखाते जैसा वह दिखाई देती है, बल्कि उसे अलग-अलग कोणों और रूपों में विभाजित करके एक नई संरचना बनाते हैं।
इस शैली में वस्तु के कई पहलुओं को एक ही चित्र में दिखाया जाता है, जिससे चित्र थोड़ा अमूर्त (Abstract) और विश्लेषणात्मक दिखाई देता है।

उत्पत्त

क्यूबिज़्म का विकास लगभग 1907 से 1914 के बीच हुआ। इस कला आंदोलन की शुरुआत मुख्य रूप से दो महान कलाकारों ने की— Pablo Picasso और Georges Braque।

1907 में पिकासो की प्रसिद्ध पेंटिंग Les Demoiselles d’Avignon (एविग्नोंन  की स्त्रियाँ) को क्यूबिज़्म की शुरुआत माना जाता है। इस पेंटिंग में मानव आकृतियों को अलग-अलग ज्यामितीय रूपों में दर्शाया गया था। किंतु ये चित्र (1916) तक सार्वजनिक नहीं हुआ था। यही वजह है की कुछ विद्वान ब्राक की पेंटिंग- हाउस एट ल एस्टेक (Houses at l’Estaque) (1908) को पहला घनवादी काम मानते हैं। यह पेंटिंग सेलन द ओटम कला प्रदर्शनी में प्रदर्शित हुई थी। इस प्रदर्शनी में ब्राक की पाँच पेंटिंग अस्वीकृत हुईं थी। वहाँ हेनरी मैटीस ने निर्णायक के रूप में ब्राक की इन पेंटिंग को छोटे घनकार कहा। ये वही पल था जब पहली बार घन शब्द का प्रयोग हुआ।

ब्राक ने अपने चित्रों को वापस ले कर पेरिस में एक प्रदर्शनी में उन्हें प्रदर्शित किया। इस प्रदर्शनी की समीक्षा लुई वाक्सेल ने एक पत्रिका में प्रकाशित किया। लुई ने इन चित्रों को के बारे कहा कि  चित्रों में घनकारों के अलावा कुछ नहीं है।

इस प्रकार पहली बार ब्राक के चित्रों के लिए घनवाद शब्द का प्रयोग सार्वजनिक रूप से हुआ। जबकि घनवादी सिद्धांत के आधार पर पिकासो के चित्र ज़्यादा घनवादी थे।

क्यूबिज़्म के विकास को मुख्यतः दो चरणों में बाँटा जाता है:

1.     विश्लेषणात्मक घनवाद (Analytical Cubism) का परिचय

विश्लेषणात्मक घनवाद कला शैली में कलाकार किसी वस्तु या दृश्य को उसके प्राकृतिक रूप में चित्रित नहीं करता। बल्कि उसे छोटे-छोटे टुकड़ों और ज्यामितीय आकारों (जैसे घन या क्यूब्स) में तोड़कर फिर से व्यवस्थित करता है। इसमें वस्तु को केवल एक ही दिशा से नही देखा जाता। इसके उलट, उसे हर संभव कोण से एक ही साथ दिखाने का प्रयास किया जाता है।

मुख्य विशेषताएं (1908-1912 ई.)
  • इसमें नैसर्गिक आकारों का विश्लेषण करके उन्हें छोटे घनाकारों अथवा अन्य ज्यामितीय आकारों में विभाजित किया जाता है।
  • कलाकार वस्तुओं को पारदर्शी मानते हुए एक पदार्थ के पीछे दूसरे पदार्थ को भी पूरी तरह चित्रित करते थे।
  • जिससे चित्र की गहराई और विरूपण स्पष्ट होता था।
  • विषय वस्तु: इसमें प्राकृतिक दृश्यों के स्थान पर ‘स्टिल लाइफ’ (जैसे वाद्य यंत्र, मेज, कुर्सी, बर्तन) और परिचित व्यक्तियों के चित्रों को प्राथमिकता दी गई।
  • सीमित रंग योजना: इस शैली में चटकीले रंगों को त्यागकर मटमैले और एक-रंगीय (Monochromatic) रंगों का प्रयोग किया गया। इसे परिसिमीत घनवाद (Hermetic Cubism) भी कहा जाता है।
  • प्रमुख कलाकार और रचनाएँ:
    • पिकासो: ‘सीटेड न्यूड’ (1909-10), ‘पोर्ट्रेट ऑफ वोलार्ड’ (1910) और ‘वूमेन विद अ गिटार’ (1911)।
    • ब्राक: ‘वायलिन एण्ड कैंडिल स्टिक’ (1910) और ‘स्टिल लाइफ विद ग्लास’ (1913)।
2. संश्लेषणात्मक घनवाद (Synthetic Cubism: 1912-1920)

‘संश्लेषण’ (Synthesis) घनवाद भिन्न विचारों, धारणाओं या शैलियों का मिला हुआ रूप है। इस चरण में पदार्थों का विश्लेषण करने के बजाय, अलग-अलग कल्पित आकारों और वस्तुओं के टुकड़ों को एक साथ जोड़कर एक नई रचना (Construction) तैयार की जाती थी। सरल शब्दों में, यह तोड़ने के बजाय जोड़ने की कला थी। यह घनवादी कला का दूसरा चरण माना जाता है।

  • कोलाज का जन्म: पिकासो ने सबसे पहले चित्रों में कोलाज और लिपि (Letters) का प्रयोग शुरू किया, जिसमें कागज़, कपड़ा, न्यूज़पेपर और रस्सी जैसे पदार्थों को चित्र पर चिपकाया जाता था।
  • मिश्रित माध्यम (Mix Media): इसमें एक ही चित्र में अनेक माध्यमों जैसे तैल रंग, इनेमल पेंट और बाहरी वस्तुओं का एक साथ प्रयोग होता था।
  • विशेषताएं: इस शैली में चटकीले रंगों का पुनः प्रयोग हुआ और चित्रों में ‘वस्तुनिष्ठता’ व ‘स्पर्शनीयता’ (जिसे छूकर महसूस किया जा सके) के गुण आए।
  • प्रमुख कार्य: पिकासो द्वारा निर्मित ‘स्टिल लाइफ विद चेयर केनिंग’ (1912) इस शैली का प्रतिनिधि चित्र माना जाता है। इसके अन्य उदाहरणों में ब्राक का ‘फ्रूट डिश एण्ड ग्लास’ (1921) और पिकासो का ‘थ्री म्यूजिशियन’ (1912) शामिल हैं।

4. विशेषताएँ (Characteristics)

क्यूबिज़्म आर्ट की कुछ प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • घनवादी कला में वस्तुओं को उनके वास्तविक आकरों के वजाय ज्यामितीय आकृतियों में विभाजित किया गया।
  • पारम्परिक परिपेक्ष्य का त्याग कर द्विआयामी आधार पर चित्रण हुआ।
  • एक ही वस्तु को कई दृष्टिकोणों से एक साथ दिखाने का प्रयास किया गया।
  • घनवादी चित्रों में सरल और सीमित रंग का प्रयोग किया गया।
  • इस कला आंदोलन के चित्रों में अमूर्तता (Abstractness) की अधिकता थी।
  • इस कला आंदोलन से औचारिक रूप से अमूर्त कला का विकास हुआ।
  • इस कला आंदोलन की प्रमुख देन कोलाज और मिश्रित माध्यम (Mixed Media) का प्रयोग रहा है।
  • कोलाज के माध्यम से कलाहीन, अनुपयोगी वस्तुओं का चित्रण तकनीक में प्रयोग करने का एक नया तरीक़ा मिला।
  • वास्तविकता के बजाय, घनवाद में चीजों को ठोस संरचना और रूप को बनाने पर ध्यान दिया गया।

5. प्रमुख कलाकार (Artists)

क्यूबिज़्म आंदोलन से जुड़े कुछ प्रमुख कलाकार हैं:

  • Pablo Picasso
  • Georges Braque
  • Juan Gris
  • Fernand Léger
  • Robert Delaunay

इन कलाकारों ने क्यूबिज़्म को विकसित करने और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

6. निष्कर्ष (Conclusion)

  • फ़्रान्स में उदय हो कर घनवाद पूरे यूरोप में फैल गया था।
  • कम समयावधि में ही इस कला आंदोलन ने अंतराष्ट्रीय लोकप्रियता हासिल कर ली थी।
  • आधुनिक कला में अन्य कला वादों की अपेक्षा घनवाद जयदा समय तक चला।  
  • घनवाद आधुनिक कला के इतिहास में एक क्रांतिकारी आंदोलन माना जाता है।
  • इसने कलाकारों को पारंपरिक नियमों से मुक्त होकर नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
  • घनवाद के कारण कला में वस्तुओं को देखने और प्रस्तुत करने का तरीका पूरी तरह बदल गया।
  • आज भी यह शैली आधुनिक और समकालीन कला के कई रूपों को प्रभावित करती है।
  • इस कला शैली की महत्वपूर्ण खोज कोलाज रहा है। मिक्स मीडिया से ही कोलाज का जन्म हुआ था।
  • अतः घनवाद २० वी सदी के शुरुआत का सबसे महत्वपूर्ण कला आंदोलन रहा।

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