यूरोप की कला में 20वीं सदी की की कला की शुरूआत फाववाद से होती है। इससे पहले 19वीं सदी के अंत में प्रभाववाद ने न सिर्फ इस समय की कला पर अपना प्रभाव छोड़ा। अपितु कई सारी नयी कला धाराओं को विकसित होने के मार्ग भी खोले। प्रभाववाद के बाद प्रतीकवाद, आर्ट नूवो (Art Nouveau) व नाबी कला (Les Nabis) शैलियाँ भी विकसित हुईं मगर वो इतनी प्रभावी नहीं थीं जितनी कि फाववाद की कला।
{अवश्य पढ़े: प्रभाववाद की कला, नव प्रभाववाद की कला, उत्तर प्रभाववाद की कला, क्लोड मोने (Claude Monet)}
- परिचय
- प्रष्ठ-भूमि
- जंगलवाद की का जन्म
- जंगलवाद की कला की विशेषताएँ
- आधुनिक कला पर प्रभाव
- प्रमुख चित्रकार
- निष्कर्ष
परिचय
यूरोप की कला में 20वीं सदी की की कला की शुरूआत फाववाद से होती है। इससे पहले 19वीं सदी के अंत में प्रभाववाद ने न सिर्फ इस समय की कला पर अपना प्रभाव छोड़ा। अपितु कई सारी नयी कला धाराओं को विकसित होने के मार्ग भी खोले। प्रभाववाद के बाद प्रतीकवाद, भविष्यवाद, आर्ट नूवो (Art Nouveau) व नाबी कला (Les Nabis) शैलियाँ भी विकसित हुईं, मगर वो इतनी प्रभावी नहीं थीं जितनी कि फाववाद की कला।
प्रष्ठ-भूमि
19 वीं सदी के अंत में प्रभाववाद की कला ने बहुत प्रभाव डाला। विशेषकर उत्तर प्रभाववाद ने कला को विकसित होने के कई मार्ग खोले। २० वीं सदी की कला के विकास में वान गो, सेजां, गौगैन, सोरा, लोत्रेक क्लिमट आदि कलाकरों ने की विशेष भूमिका रही है। उत्तरप्रभाव की कला से प्रभावित हो कर, दो प्रमुख कला की विचारधारा विकसित होने लगीं:
- पहली- वैज्ञानिक प्रवृत्ति
- दूसरी- मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति

वैज्ञानिक प्रवृत्ति
- यह विचारधारा तत्कालीन वैज्ञानिक खोजों व अविष्कारों पर आधारित थी।
- इस प्रवृत्ति ने वैज्ञानिक खोजों, राजनैतिक परिवर्तन, औद्योगिक क्रांति व विचलित आस्थाओं को महत्व दिया।
- इस प्रवृत्ति ने घनवाद, अमूर्त कला, भविषयवाद आदि कला आंदोलनूँ को विकसित किया।
- इसी समय कुछ कलाकार समूह भी बने जैस- द ब्रिज और ब्लू राइडर
- इस विचारधारा ने पूर्व परम्पराओं व बंधनों को त्याग दिया।
मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति
- यह विचारधारा कलाकरों के मनोवैज्ञान व आंतरिक अभिव्यक्ति पर आधारित थी।
- इस विचारधारा ने भी पूर्व परम्पराओं व बंधनों को त्याग दिया।
- इस विचारधारा से फ़ौववाद व अभिव्यंजनावाद जैसी कला शैलियाँ विकसित हुईं।
संक्षिप्त में कहें तो २० वीं सदी की शुरुआत में फ़ौववाद कला आंदोलन का बहुत बड़ा प्रभाव है. ओर फ़ौववद के ऊपर १९ वी सदी की कला विशेषकर प्रभाव वाद का विशेष योगदान है।
फाववाद की कला का जन्म
फाववाद का जन्म 1905 में हुई प्रदर्शनी की आलोचना से हुआ। वास्तव में हुआ ये था 1903 में सॉसाययटी द सलोन द ऑटम (The Society the Salon the Autumn) की स्थापना हुई। इस सोसायटी का उद्देश्य नयी कला शैलियों को प्रोत्साहित करना था। इसी सोसायटी में 1905 में हेनरी मैटीस की अगुवाई में नए कलाकरों की एक प्रदर्शनी आयोजित हुई। हेनरी मटिस व उनके साथी चित्रकारों ने नए तरीक़े से बने चित्रों को प्रदर्शित किया। इन चित्रों में रंगों की तीव्रता और चमक विशेष रूप से उल्लेखनीय थी। दूसरे शब्दों में कहें तो इन कलाकरों ने नए- नए प्रयोगों को अपने चित्रों में दिखाया।
प्रदर्शनी में मरकवे के कांस्य की मूर्ति भी प्रदर्शित की गयी जो इन चित्रों के बीच में थी। ये मूर्ति पुनरुत्थान क़ालीन चित्रकार दोनतेल्ली की शैली में बनी हुई थी। कुल मिला के सभी चित्रकारों की शैली में विरोधाभास सा था।
इन्हीं विरोधाभास की आलोचना करते हुए लूईस वॉक्सेल्स (Louis Vauxcelles) ने कहा “दोनतेल्ली इन थे मिडल ओफ़ वाइल्ड बीस्ट्स”
इसी स्टेट्मेंट या व्यंग के कारण इन चित्रकारों को फाव या जंगली कहा गया। अतः इनकी कला शैली को फाववादी या जंगलवाद के नाम से प्रसिद्धि मिली।इसका स्थापक हेनरी मैटीस को माना गया।
फाववाद की विशेषताएँ
- यह कला शैली पूर्व की कला परम्पराओं से मुक्ति व नए धरातल के प्रयोग का परिणाम था। ज़ाहिर है ये एक प्रयोगात्मक कला शैली थी।
- इनके कलाकार किसी एक शैली में बांधना नहीं चाहते थे। अतः सभी पूर्व की शैलियों को समानव्यतमक रूप से साथ लाने का प्रयास किया गया।
- फाववाद 1905 में जन्मा फ़्रान्स की कला शैली है जो 20 वीं सदी के प्रारम्भ में शुरू हुआ।
- यह सबसे कम समय तक रहने वला कला आंदोलन रहा जो केवल 1905 से 1908 तक ही चला।
- फाववादी चित्रकारों ने मनमाने तरीक़े से बोल्ड (भड़कीले), शुद्ध व चमकदार रंगों का प्रयोग किया। यह शैली विषय के अभिव्यंजन पर ज़्यादा ज़ोर देती है।
- इस कला आंदोलन के के चित्रकारों ने परिपेक्ष्य, रंग व रूप के सिद्धांतों को त्याग दिया था।
- वे केवल विषय वस्तु के भावनात्मक व अनुभवात्मक प्रभाव को ही अपने चित्र में दर्शाते थे।
- फाववादी चित्रकार रंगों से प्रकाश व वातावरण की भावना को चित्र में देखने का प्रयास किया।
- फाववादी चित्रकारों ने ज़्यादातर प्राकृतिक चित्रण, स्टिल लाइफ़ व पोर्ट्रेट (व्यक्ति चित्रण) किए।

आधुनिक कला पर प्रभाव
फाववादी या जंगलवादी कला पर आधुनिक कला पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। इस कला आंदोलन ने आगामी कला परंपरा या कला शैलियों के लिए नए मार्ग खोले। आधुनिक कला का पहला कला आंदोलन होने के नाते, इसने आगामी कला आंदोलनों की अगुवाई की। परिणामस्वरूप नई-नई कला परंपराओं को विकसित होने की प्रेरणा मिली।
फाववाद की कला ने चित्रकारों को एक प्रकार से स्वतंत्रता दी की अपनी तूलिका व रंगों के साथ खुल के काम करो। जैसे चाहो मनमाने तरीक़े से रंगों के साथ खेलो। चाहे पुरानी परंपराओं को मिलाओ या नई वैज्ञानिक खोजों को शामिल करो। इन प्रयोगों ने अभिव्यंजनावाद, घनवाद, भविष्यवाद व इनके बाद उपजे कला आंदोलनों को विकसित होने का मार्ग देखाया।
अतः कहना होगा कि फ़्रांस में जन्मा फासीवादी कला आंदोलन भले ही कम समय के लिए रहा। लेकिन इसका प्रभाव बहुत लंबा चला।
प्रमुख चित्रकार
इस कला आंदोलन का प्रमुख चित्रकार हेनरी मैटीस था। उसके अलावा मुख्य चित्रकारों में –
- ऑंड्रे डेरैन (Andre Derain)
- मॉरीस द व्लामिंक (Maurice de Vlaminck)
- अन्य कला कारों में –, रॉबर्ट डेबॉर्न (Robert Deborne), अल्बर्ट मार्क्वेट (Albert Marquet), चार्ल्स कैमोइन (Charles Camoin), बेला कज़ोबेल (Bela Czobel), लुई वाल्टैट (Louis Valtat), जीन पुय (Jean Puy), हेनरी मंगुइन (Henri Manguin), राउल डुफी (Raoul Dufy), ओथॉन फ़्रीज़ (Othon Friesz), एडोल्फ वानसार्ट, जॉर्जेस राउल्ट (Georges Rouault), जीन मेटज़िंगर (Jean Metzinger), कीस वैन डोंगेन (Kees van Dongen), एमिली चार्मी (Émilie Charmy), हेनरी रूसो (Henri Rousseau) और जॉर्जेस ब्रैक (Georges Braque)
निष्कर्ष
20वीं सदी की आधुनिक कला 19वीं सदी की आधुनिकता से ही विकसित हुई। देखा जाए तो 20वीं शताब्दी की कला प्रयोगात्मक कला थी। इसमें अपने पूर्व के कला आंदोलनों से समन्वय बनाते हुए नए प्रयोग किए गए। इन नए प्रयोगों में से पहला प्रयोग फाववाद कला आंदोलन था। वास्तव में ये आधुनिक कला की शुरुआत करने वाला आंदोलन था। इससे प्रेरित हो कर या इसी के माध्यम से घनवाद, भविषयवाद, व अभिव्यंजना वाद जैसे कला आंदोलन निकले।
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